Monika garg

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लेखनी प्रतियोगिता -22-Mar-2022# मोहे उस घर ना दीजो... मां

सुमी अरी ओ सुमी ! कितनी देर और लगेगी तैयार होने मे लड़के वाले कभी भी आ सकते है।"मां ने नीचे से ही सुमी को आवाज लगाई ।इधर सुमी तैयार तो कभी की हो गयी थी पर उसे नीचे आते हुए डर लग रहा था उसके पैर कांप रहे थे।
"आई मां!"सुमी ने दबी घुटी जबान मे जवाब दिया । सुंदर तो वह थी ही उसे पता था लड़के वाले एक ही नजर मे उसे  पसंद कर लेंगे। उसकी आंखों के आगे उसकी मां का गृहस्थ जीवन  घुम रहा था  किस प्रकार दादी ने उनका जीना हराम कर रखा था शादी को बाइस साल हो गये सुमी की मां के।पर दादी अब भी बाज नही आती थी अभी तक भी ताने मार देती थी "क्या लेकर आयी थी भुखे घरों की ।रोटी तक तो देती नही थी तेरी मां हमारे घर आकर ही पकवान खाने सीख गयी है।
सुमी की मां जब भी रोटी खाने बैठती सुमी की दादी का सासपुराण शुरू हो जाता था "और खाले सूड सूड के भुखे घरों की क्या बात सारा अनाज खत्म करेगी।"
बहुत बार तो उसकी मम्मी आधी रोटी खाकर ही उठ जाती सुमी कहती "मां खाना क्यों छोड़ दिया?" तो वो कहती ,"बाद मे खा लूंगी अम्मा जी गुस्से होंगी।"
सुमी जहर का घूंट पी कर रह जाती दादी को कुछ कह नही सकती थी क्योंकि अगर जरा सी अवेहलना की तो पिताजी का डंडा सिर पर पड़ता था।कितनी ही बार सुमी ने दादी को बेवजह ही पिताजी को सीखा कर मां को मरवाते देखा था और मंद मंद मुसकुराते हुए भी।साथ ही यह भी कह देती ,"बेटा इसे दो सुबह और दो शाम को जूते मारा कर तार की तरह सीधी रहेगी।"
सुमी को शुरू से ही सास नाम की बला से डर लगता था।हर बार यही कहती,"मां मुझे उस घर मत देना जहां ऐसी सास हो।"
इतने मे लड़के वाले आ गये । मां के ऊपर जाने पर सुमी ने दरवाजा खोला तो उसकी मां देखती रह गयी ,"मेरी बेटी को किसी की नजर ना लगे।"यह कह कर काला टीका लगा दिया मां ने सुमी को ।
वही बात बनी सुमी एक ही नजर मे लड़के वालों को पसंद आ गयी।घर मे दो भाई बहन और मां बाप थे। मां की तबीयत ठीक नही रहती थी सोई  दोनों बच्चों की शादी अपनी आंखों से देखना चाहती थी ।सुमी की ननद की सगाई तो हो गयी थी पर वो लोग चाहते थे की लड़के की सगाई भी हो जाए तो शादी दो दिन के अंतराल मे कर देगे।सुमी की सास बीमार थी इसलिए पहले लड़के की शादी करना ही उचित माना उन लोगों ने ।सुमी विदाई  के समय आंखों मे आंसू भर कर अपने मायके की गली घर को ऐसे देख रही थी जैसे क्या पता फिर कभी आयेगी भी या नही। क्यों कि उसने मां को कभी मामा के घर जाते नही देखा।
सुमी विदा होकर ससुराल आ गयी ।उसकी सास उसे उतारने आयी डोली से ।ये उसका अपनी सास से पहला मिलन था उसने जब कांपते हाथों से सास के पैर छुए तो सुमी की सास को सब समझ आ गया। शादी के सारी रस्में पूरी होने के बाद उसने सुमी को अपने कमरे मे बुलाया।सुमी को जो डर था वो ही होने जा रहा था वो सोचते हुए जा रही थी अब ताने मारेगी सास।
वह डरते हुए सास के कमरे मे पहुंची ।सास ने दरवाजा बंद करने को कहा और उसे अपने पास बुलाया वह डरते डरते उसके पलंग के पास पहुंची उसे लग रहा था अब होगी तानों की बौछार।
पर ये क्या सास ने बड़े प्यार से उसे गले लगाया।और बोली,"बेटा देकर बेटी ली है ।खुशी(सुमी की ननद) तो मेरी पाप की बेटी है तू मेरी धर्म की बेटी है मै तेरी मां की कर्जदार हूं जो ऐसा अनमोल खजाना हमें मिला है।बेटी अब ये घर तुम्हारा है । सम्भालो अपना घर और हां मेरा कोई पता नही हो सकता है मै कल ही राम को प्यारी हो जाऊ अपने घर को एक सूत्र मे बांध कर रखना।सुमी की आंखें छलछला आयी और वो लिपटकर अपनी सास से,रोने लगी।
जल्दी जल्दी पगफेरा करवा कर सुमी का उसे उसी समय ससुराल ले आये क्यों कि उसी दिन सुमी की ननद की बारात आने वाली थी।सुमी ने ही अपनी ननद के सारे नेग चारज किये क्योंकि सास को आखिरी स्टेज का कैंसर था।जब बारात दरवाजे पर पहुंच गयी तो सुमी कोई बात पूछने के लिए अपनी सास के कमरे मे गयी।उसने दो तीन आवाज लगाई मम्मी जी, मम्मी जी।जब सास हिली डुली नही तो वो समझ गयी कि वे परलोक सिधार गयी है।उसने बाहर आकर घर के जंवाई का द्वार पर ढुकाव करवाया।फिर धीरे से अपने पति को कान मे फुसफुसा कर एक बार अंदर  चलने को कहा।और जा कर कहा,"देखो मैं जानती हूं वो आपकी मां थी पर एक ही दिन क्या कुछ ही घंटों मे वो मुझे अपनी मां से भी बढ़ कर लगने लगी थी। मां जी हमे छोड़कर जा चुकी है बारात दरवाजे पर है माना मन अंदर से भारी है पर हमे ऊपर से नार्मल रहते हुए खुशी को विदा करना है।इतना कह कर सास के मुंह पर कपड़ा डालकर और उनके पैर छूकर सुमी चल पड़ी बारातियों का स्वागत करने। सारी शादी मे सबसे हंस हंस कर बात कर रही थी किसी को भी महसूस नही होने दिया कि घर मे लाश पड़ी है।और ननद की विदाई के वक्त हाथ जोड़कर सब को विदा कर रही थी शायद अपनी मां जैसी सास के आशीर्वाद से ही वह ये सब कर पायी।

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10 Comments

Renu

23-Mar-2022 10:24 AM

बहुत सुंदर प्रस्तुति

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Monika garg

23-Mar-2022 10:51 AM

धन्यवाद

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Abhinav ji

23-Mar-2022 08:56 AM

Very nice👍

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Monika garg

23-Mar-2022 10:50 AM

धन्यवाद

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बहुत खूबसूरत मैम👌👌एक प्रेरक, सामाजिक और खूबसूरत कहानी लिखी आपने। 👏👏 पर दो-तीन दिन को दो तीन बार edit कर लीजियेगा।

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Monika garg

23-Mar-2022 07:54 AM

धन्यवाद

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